👥👥👥👥👥 डर्टी पीपल ♠♠♠♠♠


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'हे भगवान आज का सफर तो बोरिंग होने से बचा देना।' स्लीपर क्लास रिजर्वेशन चार्ट को देखते हुए मयंक मन ही मन बुदबुदाया।
'एस 8- एस 8 कहाँ गया ये एस 8 !?, हाँ ये रहा, मेरा सीट नम्बर कितना था, रुको यार देखना पड़ेगा' टिकट निकाला देखा, 'हाँ सीट नम्बर 16, ऊपर की बर्थ है, अगर पँखा नही चला तो पूरे सफर की वाट लग जाएगी यार, हाँ ये रहा मेरा नाम मयंक , वाह मेरे शेर, जियो मयंक राजा, किसी दिन ये चार्ट तेरे आर्डर से छपा करेगा तू देखना भगवान' मयंक मन ही मन अपने आप से बात कर रहा था।
मयंक रेलवे का एग्जाम कई बार दे चुका था, कई बार के अनुभव से अभी सेलेक्ट भले ही न हो पाया हो पर एग्जाम के लिए फ्री रेलवे पास मंगवाने का नुस्खा अब उसे भी पता था। 'रेलवे वालो एस सी/एस टी को ही फ्री पास देते हो न , देखो तुम्हारे इस जमाई राजा की खोपड़ी, दो फार्म डाल दिए, एक एस सी वाले के फ्री पास से फ्री में यात्रा करेंगे, दूसरे ओरिजिनल वाले से एग्जाम देंगे। है न कमाल का आईडिया 😊 खीखीखी।'
'प्रियंका अरोरा, फीमेल , बर्थ नम्बर 15, साइड लोअर बर्थ, बोर्डिंग फ्रॉम आगरा, वाह भगवान देर से ही सही सुनी तो सही, थैंक्यू भगवान जी। अब सुनो इसके साथ किसी खड़ूस को न भेज देना, पता चले साला देखने पे भी काट खाने को आए। वैसे भी हमको कौनसा डब्बे में उससे शादी कर के घर जाना है, बस थोड़ी नज़रें ठण्डी हो जाती हैं और क्या।'
कितने एग्जाम हो गए पास फ़ैल तो लगा रहता है, बस उर्दू वाले 'सफ़र' से अंग्रेजी वाला 'सफ्फर' नही बनना चाहिए, घड़ी में देखा तो गाड़ी छूटने में अभी भी 15 मिनट और पड़े थे , क्या करूँ क्या करूँ सोचते सोचते कोई और उपाय न देख फिर से रिजर्वेशन चार्ट चाटने लगा।
'हम्म एस 8 में 9, 10,11,12,13,14 सबका सेम टू सेम पी एन आर, मतलब एक ही बाड़े के डंगर हैं (खुद ही अपने जोक पर हंसने की नाकाम कोशिश की, फिर आगे पढ़ने लगा) सबके सब अंकल आंटी है हुँह, ये भी आगरा से ही चढ़ेंगे? अरे बाप रे, भगवान मेरी प्रियंका को बचाना इन दरिंदो से, हाहाहा, पर दरिंदा तो तू है बे, वाह भगवान मुझे पता था तुम आज मेरी ही साइड में हो, प्रियंका का पी एन आर और इन डंगरों का पी एन आर अलग अलग है, मतलब ये इनके साथ तो नही ही है, क्यूँ साथ क्यों नही हो सकती, एक टिकट पर 6 लोग ही तो ट्रेवल कर पाते हैं (मन ने प्रतिवाद में तर्क दिया), नहीं नहीं ये लोग तो इनके साथ पक्का नहीं हैं ( मंयक ने अपने ही मन को झुठलाने की कोशिश की)। चल छोड़ ट्रेन में बैठते हैं। 5 मिनट ही तो पड़े हैं अब।'
ट्रेन में सवार होकर बाहर देखा, 'हम्म दिल्ली का स्टेशन देखा जाए तो उतना बुरा भी नही पर राजधानी के नजरिये से थोडा और सुधार की गुंजाइश तो है ही। जब मैं यहाँ का स्टेशन इंचार्ज बनूँगा तब देखना जितने भी साले कामचोर हैं यहाँ के , उनकी वाट लगने वाली है।' मन की मुस्कान मयंक के होंठो तक दौड़ गई।
"भाई तू भी एग्जाम देण जा रया है", सहसा उस ने पास की सीट से किसी की भारी आवाज सुनी।
देखा तो एक दुबला पतला मरियल टी बी के मरीज टाइप का लौंडा बोल रहा था।
'अबे ये क्या, साले ने इतनी हैवी आवाज़ निकाली कहाँ से ? 😂😂😂' अपने आप से बात करता मयंक ठहाका लगा जोर से हँसना चाहता था, पर फिर न जाने क्या सोच चुप ही रहा, बोला ,'हाँ, पर तुम कौनसे एग्जाम की बात कर रहे हो ?'
'यो देख भाई, कोई रेल का एग्जाम स, 3 साल हो लिए फार्म भरे न, बेरयां न इब जाके सूझया क कोई पेपर भी लेणा होया करे'
कॉल लैटर देखा, वही था, असिस्टेंट स्टेशन मास्टर आरआरबी सिकन्दराबाद, दिलसुखिया नगर में सेंटर था, मयंक बोला, 'हाँ भाई नेतराम' सामने का लड़का आश्चर्य से मुस्कुराया तो मयंक बोला, 'अरे यार तेरे कॉल लैटर में गलती से उन्होंने नाम भी लिख दिया था, मैंने पढ़ लिया तो पता लग गया 😊' कहकर हंसने लगा तो नेतराम भी उसके साथ हँस पड़ा। बातों बातों में पता ही न लगा ट्रेन न्यू डेल्ही को छोड़ निजामुद्दीन तक आ चुकी थी।
'मेरा सेंटर किसी कोट्टी नाम की जगह पर है'
'कोई ना भाई टोह ल्यांगे'
'कितने एग्जाम दिए हैं इससे पहले ?'
'बथेरे दिए भाई, पण साले रिजल्ट गा के करदे बेरा ई कोन्या पडदा'
'हाहाहा अरे यार बेरा पड़ जाता अगर तुम क्लियर करते तो नेक्स्ट स्टेज के लिए कॉल घर पर आ जाता न, रुकोगे कहाँ ?'
'बेरा कोनी, उठे जा के देखांगे'
'ये भी सही है'
इन दोनों को बातों बातों में कोई खबर ही न रही ट्रेन अब आगरा कैंट पहुँचने वाली थी।
'अच्छा सुन तेरा सीट नम्बर 8 है ? मेरा ये ऊपर वाली सीट है नम्बर 16, ओके ?'
'यो ओके फोके म ना जाणु भाई, और मेरी सीट कोई सी ना है, या खाली पड़ी थी तो यार तो गोमती धर के बैठ लिया'
'हाहा , अच्छा ठीक है, तू ऊपर आजा मेरी सीट पर हम एडजस्ट कर लेंगे। तुझे नौकरी लगाना तो मेरे बस में नहीं पर इतना तो कर ही सकता हूँ। 😄😄'
नेतराम मयंक की सीट पर बेफिक्री से पसर गया, मयंक नीचे की सीट पर ही बैठा रहा,सोचने लगा 'ये प्रियंका आई क्यूँ नही अब तक'
'एक्सक्यूज़ मी'
मीठी सी कानों में शहद घोलती आवाज़ कानो में गई तो मयंक ने पीछे मुड़ कर देखा। जीन्स टॉप पहने छरहरी काया वाली ये कन्या उससे अपनी तशरीफ़ कहीं और ले जा के पटकने का आग्रह कर रही थी।
'ये मेरी सीट है, आप हटिए यहाँ से' लड़की ने फिर से कहा।
'ओ तेरी, ये किधर से चढ़ी यार, परीयनका - प्रियंका, कसम से परी ही तो है। ' मयंक ने अपने आप से कहा। बाई गॉड झप्पी पाने का मन कर रिया था, पर कण्ट्रोल उदय कण्ट्रोल , करना पड़ा।
'आप हटेंगे अब ?' प्रियंका थोड़ी खीझ के साथ जोर से बोली।
'ज ज जी, जी हाँ, एक मिनट' कहकर मयंक उस सीट से खड़ा हो गया, प्रियंका ने अपना छोटा सा बैग सीट पर रखा और पैर इस तरह पसार के बैठ गई मानो उसे डर हो कि ये मयंक फिर से सीट पर न बैठ जाए।
'हमको तुम्हारी ये अदा बहुत पसन्द आई दिलबरा' मयंक मन ही मन बुदबुदाया।
'ओ हेल्लो, रास्ता क्यूँ रोक रखा है, डर्टी पीपल, अक्ल है के नही' अंदर आते एक मोटे थुलथुल ने कहा, मयंक ने ऊपर से नीचे तक उसे देखा, मन में बोला 'इसे इस जीन्स में किसने ठूसा होगा 😂😂 साला तोंदूमल। गहने तो देखो खुद को बप्पी लहरी समझ रहा होगा, हुँह। ' फिर उसके लिए रास्ता छोड़ दिया। एक के बाद एक 4 तोंदूमल और 2 तोंदूमलनियाँ अंदर प्रविष्ठ हुई।
'सालों के पेट तो देखो, जैसे 10-10 लीटर गैस के सिलेंडर खाए घूम रहे हैं।' सोचते सोचते मयंक सीट नम्बर 8 पर बैठ गया।
'ओह गोश, मैंने बोला था तुमको, उफ़्फ़ आई कान्ट, यार तुमको बोला था फर्स्ट एसी का टिकट करवाना था, फर्स्ट टाइम इस सो कॉल्ड स्लीपर क्लास में जाना पड़ रहा है, जस्ट बीकॉज ऑफ़ यू रोमी।' 45 साल की अधेड़ औरत एक मोटू को कह रही थी।
दूसरी मोटी शायद अंग्रेजी में निपुणता नही रखती थी, इसलिए अलग अलग भाषाओं के शब्दों के साथ एस जोड़ कर अपने क्लास को मैंटेन किए हुए थी।
'ओ यस यस, आपको तो पता ही'ज है'ज, दिस टाइपस् की बोगियोंज मेंज चोर'ज टाइप्स लोग'ज ट्रैवेलज करतेज् हैं'ज।'
'व्हाट कैन आई डु, आल एसी क्लास वाज शोविंग नो रुम, जस्ट अरेंज्ड दिस एनीहाउ, एंड यू पीपल आर बलेमिंग मी फॉर देट ? डिसगस्टिंग'
'साले मोटे कहीं के, फालतू की नौटँकी करनी है इनको बस, इतना ही बुरा लग रहा है यहां तो सालो प्लेन से जाते, वहाँ भी टिकट न मिलता तो प्राइवेट जेट से जाते, हुँह बड़े आए अम्बानी साले' मयंक मन ही मन गालियाँ दे रहा था। फिर सोचा मरने दो इन्हें मेरी परी पर कॉन्सन्ट्रेट करने दो। प्रियंका अपने कानों में इअर फोन लगा गानों में मस्ती में आँखें मूंदे लेटी थी। मयंक उसे ही निहारने लगा, देखा लड़की ने खूब मेकअप पोत रखा है, 'क्या जरूरत है अच्छी खासी तो दिखती हो ' देखा टॉप पर अंग्रेजी में बड़े बड़े अक्षरों में लिखा था "Don't stare, My face isn't here" , 'अरे बाप रे, क्या क्या लिखते हैं यार :)'।
ऊपर देखा तो नेतराम मयंक की सीट को खाला का बाड़ा समझ के आराम से लेटा हुआ था, रात के 10 बजने को थे, मयंक भी अपनी सीट पर लेट गया, नीचे देखा प्रियंका बेबी मीठे सपनों में खो चुकी थी, सामने मोटा फैमिली एक दूसरे को कोसते हुए बड़ी मुश्किल से मिडिल और अपर बर्थ पर एडजस्ट कर पाए, हाँफ गए थे मनो एवेरेस्ट चढ़ना पड़ गया बेचारों को, पता ही नही लगा कब आँख लग गई। सुबह जब जाग आई तो देखा, प्रियंका अपनी सीट पर नही थी फिर देखा तो बैग भी नही था उसका, ओ शिट, कहीं उतर तो नही गई, रिजर्वेशन चार्ट में भी उसने सिर्फ बोर्डिंग पर ही ध्यान दिया था कहाँ उतरेगी देखा ही नही, फटाफट नीचे उतर कर बोगी के गेट के पास चिपकाए चार्ट को देखा, चार्ट जगह जगह से फट चुका था, पर प्रियंका के नाम के आगे 'bho...' शब्दों से अनुमान लगा लिया वो इसी स्टेशन पर उतरी है, नेतराम नीचे भोपाल स्टेशन पर खड़ा चाय पी रहा था, 'चाय !?'
मयंक ने इंकार में सर हिला दिया। ऊपर शिकायत की मुद्रा में देखा, फिर बोला 'करवा दिया न कचरा, थोड़ी देर पहले ही उठा देते भगवान, क्या बिगड़ जाता तुम्हारा बोलो? अच्छा ठीक है सॉरी मत बोलना अब, बट लास्ट गलती है ओके'। पीछे से नेतराम ने पीठ पर हाथ मार कर उसकी तन्द्रा तोड़ी,
'र के होया भाई, न्यू ऊपर न मुं करके क्यूँ बड़बड़ कर रा ह'
'कुछ नही यार, ये मेरे और उस ऊपर वाले के बीच की बात है।'
'तू बड़ा रुस्तम स भाई, खड्यां खड्यां ऊपर फोन ला लिया, हाहाहा'
ट्रेन फिर से गन्तव्य की और बढ़ चली। कभी कोई कभी कोई आता और पैसे मांगता, एक मुस्टंडा अपने दो छोटे छोटे बच्चों के साथ जिम्नास्टिक का खेल दिखा कर पैसे मांगने लगा, बच्चे बमुश्किल 4-5 साल से अधिक उम्र के न रहे होंगे। मन किया की कुछ पैसे दे दूँ इन्हें पर फिर सोचा भइये जेब में ढाई सौ रुपल्ली है, और वहाँ जा के सही सलामत वापस भी आना है, मन को मार दिया, फिर एक बच्चा पत्थर की दो बट्टी आपस में टकरा कर 'तुम तो ठहरे परदेसी साथ क्या निभाओगे' गाने लगा। मयंक सोचने लगा, 'प्रियंका, ये गाना तुम्हे डेडिकेट किया, जा बेवफा जा, 'अब तेरे बिन जी लेंगे हम, क्या हुआ जो एक दिल टूट गया'' अपनी बेवकूफी भरी बातों पर खुद ही हंसने लगा। देखा तो सामने की मोटा फैमिली ने इन बच्चों में से किसी को एक दुअन्नी तक न दी। फिर एक मोटा लेक्चर झाड़ने लगा , यू नो दिज किड्स आर अ ह्यूज सोर्स ऑफ़ मनी, वन्स आई सॉ आल दिस इन अ मूवी आल्सो, गैंग ऑफ़ बेग्गर आर बिहाइंड आल दिस। वी शुड नॉट हेव टू गिव एनीकाइंड ऑफ़ मनी तो दैम।'
'सालो एक रुपया तो तुमसे ढीला होता नही और बात कर रहे हैं कि एसी के बिना इनकी तैसी नही होती, हुँह दोगले हैं साले' मयंक को बड़ा गुस्सा आ रहा था उन पर, अचानक कहीं से एक लँगड़ा लड़का प्रकट हुआ, मैले कुचैले कपड़े वैसा ही मैल से सना शरीर, नीचे बैठा अपनी गंदी फ़टी हुई शर्ट उतारी और उसी से बोगी साफ़ करते हुए आगे बढ़ा, बोगी के एक एक केबिन को साफ कर पैसेंजर्स के सामने चुपचाप हाथ फैलाता , जिसे जो देना हो दे दे न देना हो न सही, किसी ने भी एक रूपये से बढ़कर उसे पैसा नहीं दिया, लगभग पूरा डिब्बा साफ हो चुका था, मोटा फैमिली से भी माँगा तो फिर से वही मोटा लेक्चर झाड़ने लगा, यू डोन्ट नो दिज रास्कल्स, आई नो, एंड बेग्गींग इज अ क्राइम.....'
मयंक को गुस्सा आ गया, बोला 'अरे अंकल किसी को एक रुपया देने का कलेजा नही है, तो मत दो, किसी को रास्कल क्यों कहते हो, जितना ये बेचारा कर सकता था कर रहा, शरीर से विकलांग है हिम्मत से नहीं, खबरदार अब अगर इसे बेग्गर बोला तो' फिर नीचे उतरा बीस का नोट थमाया बोला 'भाई इससे ज्यादा की तो मेरी भी हैसियत नही', पैसे पाकर लेने वाला बिना कुछ कहे चला गया, शायद बोल भी न सकता था।
अपनी सीट पर बैठते बैठते मयंक मोटा फैमिली की और देख बुदबुदाया 'डर्टी पीपल' हुँह साले।
ट्रेन अब भी अपनी पूरी गति से आगे बढ़ती जा रही थी।
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‪#‎जयश्रीकृष्ण‬
©अरुणिम कथा

👫👬💏💑👼👪 लव आज़कल (पंजाबी से हिंदी में अनूदित पोस्ट) ♠♠♠♠♠ .

केमियाणा फरीदकोट का समीपवर्ती छोटा सा गाँव , सुबह के छः बजे हैं, इतनी सुबह भी स्कूल और कॉलेज के बच्चों के कारण बस स्टेण्ड पर खासी भीड़भाड़ थी। अलग अलग कॉलेजों के लड़के लड़कियाँ अलग अलग टोलियां बना कर अपनी बस के इंतज़ार में खड़े थे।
तनु, तरनप्रीत कौर, मेडिकल स्टूडेंट गुरु गोविन्द सिंह मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप होने के कारण, आज पहली बार इस बस अड्डे पर खड़ी थी। केमियाणा में उसकी बहन रहती है, सोचा जितने दिन इंटर्नशिप चलेगी उतने दिन बहन के साथ भी रहने को मिल जाएगा यही सोच के इस कॉलेज का नाम दिया था
था। बस स्टैंड पर उसे यूँ लग रहा था जैसे सब उसी को देख रहे हों, बहुत शर्म और संकोच के साथ वो लड़कियों के झुंड के नजदीक जाकर खड़ी हो गई। लड़कियो ने एक बार नजर उठा कर गांव में नए आए इस चेहरे की तरफ देखा पर फिरपर अगले ही क्षण अपनी बातों में पुनः मशगूल हो गई।
तनु बेहद खूबसूरत नही तो बुरी भी नही थी देखने में, साँवला और गोल चेहरा, तीखे नयन नक्श, बड़ी बड़ी काली आँखे, कुल मिला कर लड़की का लुक अच्छा ही था। थोड़ी देर में बस आई, भीड़ थी पर पंजाबी सभ्याचार देखिये , 'अरे भई महिला सवारियों को सीट दीजिये' एक साथ कई आवाज़ें बस में गूँजी, एक लड़का खड़ा हो गया और तनु को भी सीट मिल गई उसके लिए सीट छोड़ने वाला लड़का वही उसी सीट के पास सट कर खड़ा हो गया। तनु चुपचाप बाहर देख कर सफ़र की समाप्ति की प्रतीक्षा करने लगी। 30 मिनट के बाद वो अपने स्टॉप पर उतरी, उसके साथ कुछ लोग और भी उतरे पर तनु बिना किसी पर ध्यान दिए अपने कॉलेज की और चल पड़ी।
कॉलेज के गेट के पास ही उसे फ्रेंड खुशदीप मिल गई , अच्छा कॉलेज था उसकी शिफ्ट कब बीती पता ही न लगा, दोपहर 2:30 बजे वापसी का रुख किया बस में फिर से भीड़ ही थी ज्यादातर स्टूडेंट ही थे सुबह की तरह, फिर से उसके लिए एक सीट खाली हो गई। बैठते वक़्त उसने कपड़ो से नोटिस किया जिसने उसे सीट दी वो वही सुबह वाला लड़का ही था। बैठते बैठते उसने धीरे से थैंक यू बोला, लड़के से नजरें टकराई तो वो मुस्कुरा भर दिया। तनु चुपचाप बाहर देखने लगी। रोज आना होने लगा, तनु अकेली आती अकेली जाती, लड़का उसे हर दिन बस स्टैंड पर तैयार मिलता , बिन मांगे उसे सीट मिल जाती, अब जब लड़का मुस्कुराता तो वो भी हल्का सा मुस्कुरा देती। एक दिन तनु को कॉलेज से लौटते लौटते 5 बज गए बस स्टैंड पर लड़का बेचैन इधर उधर टहल रहा था। तनु को देख मानो उसे संजीवनी मिल गई खुश हो गया। बस में ज्यादा भीड़ नही थी तनु चुपचाप एक सीट पर बैठ गई, नजर उठा कर देखा तो लड़का ड्राईवर सीट के पास बैठा उसे ही निहार रहा था, तनु ने नजरें झुका ली। सोचने लगी कैसा भोंदु लड़का है रोज साथ आता जाता है पर कुछ भी बोल नही सकता। एक दिन यात्रा के दौरान एक और लड़का जो उसके पास बैठा था, ने उसे सत श्री अकाल बोल उसका नाम पूछा तो उसने निःसंकोच बता दिया।
लड़का कहने लगा 'तरन जी, मेरे उस दोस्त से तो बोला भी नही जाएगा इसलिए मैं ही बोल देता ये आपसे दोस्ती करना चाहता है, अगर आपको ऐतराज़ न हो तो।'
तनु को हँसी आने लगी, सोचा 'अजीब नमूने टाइप के लोग हैं दोस्ती के लिए भी मीडिएटर की जरूरत पड़ रही है और इसे देखो 'आपको ऐतराज़ न हो तो' 😊😊
बोली, ' अरे दोस्त तो कोई भी किसी का भी हो सकता है, इसमें इतना शरमाने वाली क्या बात है ?
लड़का बोला, 'अरे वो सिम्पल वाली नही जी, स्पेशल मेरा मतलब खास वाली दोस्ती करनी है उसको आपसे'
'आपको नही लगता आपका दोस्त कुछ ज्यादा ही अजीब है, अरे जिसका नाम तक नही जानती, उसे खास फ्रेंडशिप चाहिए ? हद है सच में'
'ये भी सही है, चलो आप सिम्पल फ्रेंडशिप ही कर लो'
😊😊😊
***
'नहीं मुझे कुछ नही पता, मैं कुछ नही जानता, आना है मतलब आना है'
'अरे यार बच्चों की तरह जिद मत किया करो तुम, कैसे आउंगी मैं , समझा करो ना'
'ओके ठीक है, अब से कभी मुझसे बात मत करना'
'ये क्या बात हुई यार !? ठीक मैं कोशिश करती हूँ पर कोई प्रॉमिस नही है ओके'
(फोन पर हुई लम्बी कन्वर्सेशन के बाद के कुछ आखिरी संवाद।)
पटियाला सूट में तनु बहुत अच्छी दिख रही थी, उसके कॉफी शॉप में आते ही जशनदीप ने उसकी अगवानी करते हुए कहा, 'आओ जी मालको, पता भी इंतज़ार करते करते 3 कॉफी पी चुका हूँ'
'ठीक है ठीक है कोई बात नही, अब फटाफट एक और पीयो मेरे साथ, मुझे वापस जल्दी जाना है'
'तुम एक काम करो, तुम निकलो यहां से कॉफी भिजवा देता हूँ पार्सल'
'हर समय गुस्सा क्यों होते रहते हो खड़ूस, अच्छा ठीक है 15 मिनट रुकूँगी पर प्लीज़ प्लीज प्लीज़ और रुकने की जिद मत करना'
जशनदीप हँसने लगा, तनु उसके मुस्कुराते चेहरे में खो गई। वो जिसे उससे कुछ भी कहने में शर्म आती थी आज उस पर हक जमाने लगा था, वो जो उसका दोस्त बन कर जिंदगी में आया था आज जिंदगी से बढ़कर मालूम होता था। ये दोस्ती, दोस्ती से बढ़कर वाले रिश्ते में बदलते बदलते बहुत सी सिम्पल मुलाक़ातें, गिफ्ट्स, टेलिकॉम कम्पनियों का रेवेन्यू बढ़ाऊ लम्बी लम्बी बातों का सफर तय कर चुकी थी। तनु ने कभी नही सोचा था की कोई उसके लिए इतना खास हो सकता है, एक डॉक्टर को तो वैसे भी कठोर दिल वाला होना चाहिए न जाने उसके दिल में इतना प्यार कैसे बचा रह गया और तो और कम्प्यूटर इंजीनियर से ? वाकई जोड़ियां रब्ब बना के भेजता है।
'अरे कहाँ खो गई यार, कॉफी खत्म करो अपनी' जशन ने कहा तो वो अपने सर पर हल्की चपत लगा कर मुस्कुरा दी। जशन फिर से मुस्कुराने लगा, तनु ने थोडा ऊपर देखा फिर सोचने लगी 'जिंदगी वाकई खूबसूरत है, थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू बाबा जी'
***
तनु गुस्से से हाथ इधर उधर पटक रही थी।
'क्या हुआ यार ?'
'यार फोन ही नहीं लग रहा, आउट ऑफ़ कवरेज आ रहा है'
'कहीं बाहर गया होगा यार'
'5 दिन हो गए लगातार यही टोन बज रही है' 😢
'किसी काम में बिजी होगा ना, खामखाँ टेंशन ना ले'
'अगर मैं एक बार फोन न उठाऊं तो वो आसमान सर पे उठा लेता है, और खुद का 5 दिन से कोई अता पता नही है'
'अच्छा तूने उसके दोस्त राजवीर से पता किया?'
'अभी उसके पास से ही आ रही हूँ, उसने बोला उसे भी नही पता।' 😢
'ओह, तब तो वाकई टेंशन की बात है, उसके घर चले ?'
'हाँ यार, लगता है जाना ही पड़ेगा'
थोड़ी ही देर में बड़े से महलनुमा घर के दरवाजे पर दस्तक दी, चौकीदार बाहर आया 'हाँ जी मेमशाब'
'वो जशन......'
'उ तो गोया मेमशाब, पोंच रोज हुई गोया।' उसकी बात पूरी होने से पहले ही चौकीदार बोला।
'पर कहाँ गया ?'
'बहार का मुलुक गोया मेमशाब, बोला उदर ई रेगा, उसका शादी भी है।'
'कौनसा मुल्क ? कोई नम्बर वम्बर तो होगा ही'
'उ शब हम नाइ जानता मेमशाब, हमको कोण नम्बर देगा'
'ओह शिट' तनु गिरते गिरते बची।
'संभाल अपने को यार' खुशदीप ने कहा।
तनु अब भी चकरा रही थी, बोली 'सब कुछ, सब कुछ गलत हो गया यार, सब कुछ गलत हो गया'😢
'कुछ नही होगा, तू घबरा मत'
'सब गलत हो गया यार, जस्ट गिव मी ए फेवर प्लीज़'
'हाँ बोल ना'
'यार मुझे एबॉर्शन करवाना है, आई ऍम हैविंग 3 मन्थ प्रेग्नेंसी, सब गलत हो गया यार, सब गलत हो गया, शिट शिट शिट, हुँह लव माय फुट'
‪#‎जयश्रीकृष्ण‬
© अरुण

👬💏💑👼👪 लव आज्ज़कल ♠♠♠♠♠ .

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केमियाणा फरीदकोट दे कोल बसैया निक्का जा पिंड , सवेरे छी वजे, एन्ने सवेरे वी स्कूल ते कालज दे जवाका करके बस अड्डे ते चंगी भीड़भाड़ हो जांदी ए। वख वख कालजां दे कुडियां ते मुंडे अड अड टोलियां बनाके अपणी बस दी उडीक च खलोते सी।
तनु, तरनप्रीत कौर, मेडिकल दी स्टूडंट गुरु गोविन्द सिंह मेडिकल कालज च इंटर्नशिप होण करके, आज पैली वारी इस बस अड्डे ते खड़ी सी। केमियाणा च उसदी भेण रेंदी आ, जिने देन इंटर्नशिप चलु उने देन भेण कोल ला लूँ सोच के एस कालज दा ना दिता सी। अड्डे ते उसनु एदां लगदा पया सी जीवें सारे ओसी नु वेखी जांदे होण, संगदी सङ्गोंदी कुड़िया दे ग्रुप कोल जी जाके खड़ गई। कुडियां ने इक नज़र उठा के एस पिंड दे नवें चेहरे वल वेख्या पर फेर आवदी गला च मशगूल हो गियाँ।
तनु हदो वद सोणी नइं ते माड़ी वी नइँ सी वेखण च, साँवला ते गोल चेहरा, तिखा नक, वड्डी वड्डी कालीयां अखां , कुल मिला के चंगा लुक सी कुड़ी दा। थोड़ी देर च बस आई, भीड़ सी पर पंजाबी सभ्याचार वेखो 'ओ बाई जनानिया सवारियाँ नूं बैण देओ बई' भीड़ च इक्कोनाल कई अवाजां आइयाँ, एक मुंडा खड़ा हो गया ते तनु नु वी सीट मिलगी, उसनु सीट देण आळा मुंडा उसे दी सीट कोळ खड़ा रया। तनु चुपचाप बाहर वल वेख के सफर दे खत्म होण दा इंतेज़ार करण लग गई। 30 मिनटां बाद ओ अपणे स्टॉप ते उतरी उस दे नाळ होर वी कई सवारियाँ उतरियां तनु कोई ध्यान दिते बग़ैर अपने कालज वल तुरपई।
कॉलेज दे गेट कोळ ई ओसनु उसदी फ्रेंड खुशदीप मिळ गई , चंगा कालज सी उसदी शिफ्ट कदों खतम होइ कुश पता ही ना लगा, दुपेरे 2:30 व्जे वापसी दा रुख किता बस च एस वारी फेर भीड़ ही सी ज्यादातर स्टूडंट ही सी सवेरे वांगु, पर ओस लेई फेर तो इक सीट खाली हो गई। बैठदे वेले उसने कपड़ेयाँ तों नोटिस किता जिसने उसनु सीट दिती ओ ओही सवेरे आळा मुंडा इ सी वो। बैठदे बैठदे उसने हौली जी थैंक्यू बोल्या, मुंडे नाळ नजरां टकराईयां तां ओ वी मुस्कुरोण लग पया । तनु चुपचाप बार वेखण लगी। रोज आण जान होण लगा, तनु कली औंदी कली जांदी, ओ मुंडा उसनु हर दिन बस स्टैंड ते तैयार लब्दा , बिना मंगे ओनु सीट मिळ जांदी, होण जदो कदे मुंडा ओसनु वेख के मुस्कुरान्दा तां ओ वी स्माइल कर देंदी। एक देन तनु नु कालज चों आंदे आंदे पंज वजह गए बस अड्डे ते वेख्या याँ मुंडा हले वी बेचैन हो के ओथे ही गेडियां लाई जांदा सी। तनु नु वेख्या तां लग्या जीवें मरदे नु संजीवनी बूटी लब गई होवे खुश हो गिया। बस च ज्यादा भीड़ नही सी तनु चुपचाप इक सीट ते बै गई, नजर चुकी तां वेख्या देखा मुंडा ड्राईवर सीट कोळ बैठा उसे नु ही निहारी जा रिहा सी , तनु ने नजरां झुका लितियां। सोचण लगी कैहोजा पागल है रोज नाळ औंदा जांदा है पर कुज भी बोल नही सकदा 😊 । इक दिन सफर दे दौरान इक होर मुंडा जेड़ा उसी दे नाळ बैठ्या सी, ने उसनु सत श्री अकाल बोलके उसदा ना पुछ्या तां उसने बेझिझक दस ता।
मुंडा आखण लगा 'तरन जी, मेरे ओस दोस्त तों तां बोल्या वी नई जाणा एसलई मैं ही आख दिना, ओ थोडे नाळ फ्रेंडशिप करना चउन्दा है, जे थोनु कोई ऐतराज़ ना होवे तां।'
तनु नु हासा ओण लग पया, सोच्या 'अजीब नमूने टैप लोग ने दोस्ती लई वी मीडिएटर दी लोड़ पई जांदी वा ते एसनु वेखो 'जे थोनु ऐतराज ना होवे तां' 😊😊
बोली, ' दोस्त तां कोई वी किसे दा वी हो सकदा, इस च ऐना संगण आळी केड़ी गल है?'
मुंडा कहन लगा, 'ओजी ओ वो सिम्पल आळी नही जी, स्पेशल मेरा मतलब खास आळी गुड़ी दोस्ती करणी जे ओने थोडे नाळ'
'थोनु नई लगदा तुहाडा दोस्त कुज ज्यादा ओ अजीब है ? मेरा मतलब जिसदा ना वी मेनु नहीं पता ओसनु खास चाहिदी ए ? हद है सच्ची'
'आ वी सई है, चलो तुसी सिम्पल फ्रेंडशिप इ कर लवो'
😊😊😊
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'नइँ नइँ मेनु कुश नी पता, मैं कुज नइँ जाणदा, औणा मतलब औणा है'
'ओये यार जवाकां वांगु जैद ना करया कर तू, किवें आउंगी मैं, समझया कर ना'
'चंगा फेर ठीक है, हुण तो बाद कदे मेरे नाळ गल ना करीं'
'ल आ की गल होइ यार !? चल ठीक आ मैं कोशिश करांगी पर कोई प्रॉमिस नइँ है ओके'
(फोन ते होइ लम्बी कन्वर्सेशन तों बाद दे कुश आखिरी डाइलोग)
पटियाला सूट च तनु बहोत चंगी लग रही सी, उसदे कॉफी शॉप ते औंदे ही जश्न ने उसदी अगवानी करदे किहा, 'आओ जी मालको, पता वी है इंतज़ार करदे करदे 3 कॉफी पी चुका हाँ'
'ठीक है ठीक है कोई गल नइँ, हुण फटाफट एक होर पी मेरे नाळ, मेनू वापस छेती जाणा'
'तुम एक कम कर, तू जा एत्थो, तेरी कॉफी मैं मगरों घल दऊँ पार्सल'
'हर वेळे गुस्सा क्यों हुना ए खड़ूस जा, चंगा ठीक है 15 मिनट रुकांगी पर हुण प्लीज़ प्लीज प्लीज़ होर रोकण लई जिद ना करीं'
जशनदीप हसण लगा, तनु उसदे मुस्कुरोंदे चेहरे नु वेखदे वेखदे खो गई। ओ जिनु ओसनु कुज वी केंदे नु सङ्ग लगदी सी अज उसते हक जमौन लग पिया सी,ओ जेड़ा दोस्त बण के उसदी जिंदगी च आया सी अज जिंदगी तो वध लग रिहा सी। ओ दोस्ती, दोस्ती तो वध आळे रिश्ते च बदलदे बदलदे बहोत सारियां सिम्पल मुलाक़ातां, गिफ्ट्स, टेलिकॉम कम्पनियों दा रेवेन्यू वधोण आळी लमिया लमिया गलां च गुजरदियां रातां दा सफर तय कर चुकी सी। तनु ने कदे नइँ सोच्या सी के कोई उस लई वी इन्ना खास हो सकदा है, इक डॉक्टर नु तां वैसे वी पक्के दिल आळा होणा चाहिदा पता नइँ किवें उसदे दिल च इन्ना प्यार बच्या रह गि होर ते होर ओ वी कम्प्यूटर इंजीनियर नाळ ? वाकई जोड़ियां रब्ब बना के घलदा है।
'ओये कित्थे खो गी यार, कॉफी खत्म कर अपणी' जशन ने किहा तां ओ अपणे सिर ते हल्की चपत लगा के स्माइल करण लग पई। जशन वी मुस्कुराण लग पया, तनु ने थोडा उते वेख्या फेर सोचण लग पई 'जिंदगी वाकई बहोत सोणी चीज हुंदी आ , थैंक्यू थैंक्यू थैंक्यू बाबा जी'
***
तनु गुस्से नाळ हाथ एदर ओदर सुट रही सी।
'की होया यार ?'
'यार फोन ई नइँ लगी जांदा, आउट ऑफ़ कवरेज आई जांदा ए'
'किते बार गया होणा यार'
'5 दिन हो गए लगातार एहो ट्यून वजी जांदी आ' 😢
'किसी कम च बिजी होणा ना, खामखाँ टेंशन ना ल'
' जे मैं इक वारी फोन ना चुका तां ओ असमान सिर ते चुक लेंदा अ, ते खुद डा 5 दिन तो कोई अता पता नइँ'
'अच्छा तू उसदे दोस्त राजवीर तो पता किता ?'
' हुणे उसदे कोळ तो ई आई हाँ केंदा उसनु वी कुश नी पता।' 😢
'ओह, फेर तां वाकई टेंशन आळी गल अ यार, उसदे घर चलिए ?'
'हाँ यार, लगदा जाणा ई पेणा'
थोड़ी देर च वडे जेहे महलनुमा घर दे मेन दरवाजे ते दस्तक दिती,
चौकीदार बाहर आया 'हाँ जी मेमशाब'
'ओ जशन......'
'उ तो गोया मेमशाब, पोंच रोज हुई गोया।' उसदी गल पूरी होण तो पेला ई चौकीदार बोल पया।
'पर कित्थे गया ?'
'बहार का मुलुक गोया मेमशाब, बोला उदर ई रेगा, उदर व्याह है उसका'
'केड़ा मुल्क ? कोई नम्बर वम्बर तां होणा ओथो दा'
'उ शब हम नाइ जानता मेमशाब, हमको कोण नम्बर देगा'
'ओह शिट' तनु डिगदे डिगदे बची।
'संभाल अपणे नु यार' खुशदीप ने किहा।
तनु हले वी चकरा रही सी, बोली 'सारा कुश, सारा कुश गल्त हो गया यार, सारा कुश गल्त हो गया'😢
'कुज नइँ होणा, तू घबरा ना'
'सारा गल्त हो गया यार, जस्ट गिव मी ए फेवर प्लीज़'
'हाँ बोल ना'
'यार मैं एबॉर्शन करोणा, आई ऍम हैविंग 3 मन्थ प्रेग्नेंसी,सारा कुश गल्त हो गया यार, सारा गल्त हो गया, शिट शिट शिट , हुँह लव माय फुट'
***
‪#‎जयश्रीकृष्ण‬
© अरुण

🅱➕ बी पॉजीटिव यार... ♠♠♠♠

ओ हैलो !! कुछ और समझने की कोई जरुरत नहीं है, मैं आपको अपना ब्लड ग्रुप नहीं बता रहा हूँ ओके..कभी तो मुझे सीरियसली लिया करो यार.. मैं सकारात्मक सोच की बात कर रहा हूँ.. ये भी सचमुच बड़े कमाल की चीज है. अहम अहम 😊😊😊 थोड़ा टिपिकल होकर बात करें.? हमारे कार्यों की सफलता हमारी मानसिक स्थिति पर आधारित होती है, स्वयं महामना विवेकानंद जी का भी यह कथन है कि ' निराशाजन्य सोच सर्वदा असफलताओं का ही पोषण करती है..!!'
डोज कुछ ज्यादा तो नहीं हो गई न..? नहीं ? तो लीजिए आगे सुनिए मेरे एक मित्र है घसीटाराम.. अब भगवान ने नाम की तरह ही सोच भी दे दी बेचारे को घिसी हुई।
एक दिन मेरे पास आकर कहने लगे कि यार ये दुनिया बड़ी ज़ालिम है, हमऩे पूछा 'अरे भई ! अब क्या हो गया?'
बोला 'क्या बताए, क्या छुपाएं अरुण भाई'
हमने कहा कि 'अबे कुछ बोलोगे भी कॉकरॉच की दुम' 😬
तो बोला , 'सब के सब मतलबी लोग है, पड़ोस का छद्मीलाल वैसे तो बड़ा हिमायती बनता है आज उससे उसकी गर्लफ्रेंड का नम्बर मांगा था कमबख्त साफ मुकर गया, कहता है ये भी कोई बाँटने की चीज है, बड़ा आया फिलॉसोफर मेरा समोसा खाया तब तो याद नहीं आया तब तो फोकट में बड़े चटखारे ले ले कर खींसे निपोर रहा था..आज हम जान गये है भईया ये दुनिया मुझ जैसे अच्छे लोगों के लिए बनी ही नहीं है.ये सोच के आपके पास आया हूँ कि आपसे कह दूँगा तो दुख थोड़ा हल्का हो जाएगा 😢😢
मुझे उसकी रोनी सुरत देख कर तरस नहीं हंसी आ रही थी. 😊😊 मैंनें कहा 'पोपट प्यारे सुन,पहले तो थोबड़े की घड़ी का टाइम ठीक कर, और ये बता चिलगोजे के छिलके के तू छद्मी के पटोले को ५ रुपये का माल समझता है क्या? जो वो तुझे तेरे बासी समोसे के बदले में गिफ्ट कर दे? अबे बासी कढ़ी के फफूंद लगे पकोड़े ,तू कोई और जुगाड़ तलाश ले ना' 😤
मेरी बात सुनकर उसकी आँखों में थोड़ी चमक आई पर फिर से मायूस होकर बोला, पर भईया मुझे कोई लड़की भाव ही नहीं देती।
तो मैंनें कहा 'पोपट प्यारे, तेरे ये चमेली चुपड़े बालों को देखकर तो मैं भी तुझे भाव न दूँ, कोई लड़की क्यूँ देगी? '
बेचारे का मुँह और ज्यादा लटक गया 😢😢😢😢😖😖😖 अब तो मुझे भी उस पर तरस आ गया।
मैंनें कहा 'फिक्र नॉट प्यारे अब जब गलती से तुझे दोस्त
बोल ही दिया है तो दोस्त के लिए कुछ न कुछ करना तो पड़ेगा ही । तो बंधु पहले अपना हुलिया थोड़ा सुधार, आजकल जो दिखता है वही बिकता है, अरे जब शोरुम तबेले जैसा बनाओगे तो गोबर ही तो मिलेगा ना'
घसीटा मुझे बड़े ध्यान से सुन रहा था।
अचानक बोला तो अब मैं करुँ क्या?
मैं बोले जा रहा था, 'प्यारे थोड़े मॉर्डन बन जाओ थोड़े मॉर्डन दिखो, खुबसुरत लग, किसी लड़की को टार्गेट बऩा, वेलेंटाईन डे का वेट भूल के भी मत करना,वो तो वैसे भी तुझ जैसे छिछोरों की हजामत का दिन है। '
वो बोला "हाँ पिछली बार भी इस दिन मुझे लेडी पुलिस ने खूब धोया था।"
हमने कहा कि 'पार्टनर , अपुन कभी गलत सलाह नहीं देते किसी को, फिर तू तो अपऩा इच् पंटर है, तो बेटा लड़की के सामने छिछोरापन मत देखाईयो, खुबसुरत लड़की को खुबसुरत फूल दे, मीठी लड़की को चॉकलेट दे..पर प्यार से, और ......अकेले में!!'
उसने मुझे टोका 'अकेले में क्यूँ?'
मैंनें कहा के 'अबे गधे कभी तो इस तरबूज का इस्तेमाल किया कर जो भगवान ने तेरे कंधों के बीच रख छोड़ा है 😬😬😬😬 अबे प्राइवेसी भी तो कोई चीज है यार और मान लो अगर वो लड़की तेरी धुनाई भी कर दे तो किसी को पता भी नहीं लगेगा कि तू पिट के आया हैं, कुछ फिल्में विल्में देख, ईस्टाइल विस्टाइल सीख..ओके..??
ओके!!!
घसीटा भी इतने आत्मविश्वास से बोला तो लगा
कि पट्ठे को बात जम गई।
कई दिन बाद छद्मी मिला रोनी सुरत लिए
😢😢😢😢
हमनें पूछा कि 'प्यारे क्या हुआ?'
वो बोला 'न जाने घसीटा को अचानक क्या हुआ है, एकदम बदल गया है, बिलकुल हीरो लगता है।'
हम बोले ,"बोले तो एकदम रजनीकांत की तरह?"
वो बोला , "इग्जेक्टली,आपको कैसे पता?" उसने शकी ऩजर से मुझे देखा
😎😎😎😎
मैंनें कहा ' अरे तुम्हारी बातें सुनकर तुक्का मारा था'
वो बोला 'भईया पता नहीं कहाँ से पट्टी पढ़ कर आया है, नालायक नें मेरी इकलौती 'आईटम' पर ही हाथ साफ कर दिया, सुना है ४-५ और भी पटा रखी है '
😥😥😩😟😨😞
बोला कि 'घसीटा में इतनी हिम्मत नहीं हो सकती जरुर ये किसी और की खुराफात है, मुझे पता चल गया न तो मैं उसकी हड्डी पसली एक कर कर दूंगा'
कहकर उसने मुझे ..घूरा.।
मैंनें झेंप कर कहा, 'अरे छद्मी यार मुझे काम याद आ गया मुझे जाऩा है'
जाते जाते मैंने मुड़कर देखा तब भी वो मुझे घूर रहा था। घर आकर सोचा कि घसीटा को फोन कर के पूछूँ के छद्भी की आईटम क्यों उड़ाई? फोन किया तो आवाज आई
"हैलो हू'ज दिस?"
हमने कहा हम तुम्हारे अरुण भइया बोल रहे है, उसने कहा आई डोंट नो एनी पर्सन ऑफ़ दिस नेम,और फ़ोन काट दिया 😭😭😭😭😭
अब तो हमने माथा पकड़ लिया। लगता है घसीटा कुछ ज्यादा ही सकारात्मक हो गया था।😱😱😱😱😱
‪#‎जयश्रीकृष्ण‬
‪#‎पुरानीपोस्ट‬

(राजस्थानी से हिंदी में) अनूदित पोस्ट

एकबार मेरी साली ने 👸 मुझे फोन किया कि , जीजाजी अब की बार खेत में खरपतवार बहुत है ...आप दो चार दिन काम करवा देना न पिलीज और ककड़ी तरबूज 🍉भी खा लेना !
तरबूज 🍉 का नाम आते ही मेरे मन में उमंगे धिनचक धिनचक डांस करने लगी 😋! पर फिर भी खरपतवार कौन उखड़ेगा भला?? मेरा तो पानी का लोटा भरने का भी कभी मन नही करता !
👶 टोरू की माँ बोली कि जाना तो पड़ेगा ....मेरी बहन कौनसा रोज काम के लिए कहती है ?.....चुपचाप जा कर काम करवा कर आ जाइए !
अब कोई चारा भी तो नही बचा .... मैं दूसरे दिन तैयार हो गया !
टोरू की माँ बोली कि ,
"वहाँ इंसानों की तरह रहना .... यहाँ की तरह आठ आठ रोटी।मत ठूसना और सुबह उठ कर ढंग से नहा धो लेना ओके... अगर मेरी बहन की कोई भी कम्प्लेन आई ना तो खोपड़ी से बचे खुचे बाल भी उखाड़ लूंगी."😳
मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और ऊँट 🐪पर बैठ गया !
शाम के वक़्त साढू के घर जा पहुंचा....वहां मेरी खूब खातिरदारी हुई ... चूरमा और टिंडे की सब्ज़ी ...साथ ही मस्त मलाईदार दही मने बढ़िया भोजन करवाया !!
फिर मैंने थोड़ी देर अल्ला जिल्ला बाई की मांड गायकी 🎵 का लुत्फ़ उठाया और सो गया !!
सुबह जल्दी ही हम सब नहा धो कर खेत पहुँच गए और खरपतवार उखाडूं मिशन में जुट गए !!
अब भाइयो मेरा हाल तो ऐसा हो गया मानो....किसी ने नई नवेली गधी पर बीस मन बाजरी लाद दी हो !!😩😫😱
हे मोरे कन्हैया, हे दया निधान, कब यूँ दिन ढलेगा और कब मेरा पीछा छूटेगा !!
दोपहर हुई तो मेरी साली बोली कि....जीजाजी रोटी 🍪खा लो !!
मुझे भूख तो इत्ती जबरदस्त लग रही थी की कच्ची बाजरी का फाल चबा जाऊँ ....पर रिश्तेदारी थी और इज्जत का कचरा थोड़े न करवाना था !!
खैर , मैं और मेरा साढू खाने पर बैठे !
खाने में बाजरे की मस्त रोटियाँ, बिलकुल घी से तर और मटकाचर की चटनी !!
मेरी साली ने मुझे चार रोटियाँ दी और बोली -
"दीदी का मैसेज आया है कि ... तुम्हारे जीजाजी बस चार रोटी ही खाते हैं, उन्होंने नियम बना रखा है "
'अरे तेरा भला हो, शैतान औरत....और ये मोबाइल धोबाईल 📱और कुछ नही हैं बस मेरे जैसे बेचारों की मौत का सामान हैं !!
दस रोटी की भूख है और चार से संतोष करना पड़ रहा है 😢😢....ये चार तो बेचारी मेरे दांतो में ही चिपक कर रह जाएंगी ?? पेट में क्या घन्टा जाएगा !!
पर कोई उपाय नही था भाई लोग ...मैं चार रोटी ठुसी और ऊपर एक लोटा पानी पी लिया !!
जैसे ही मैंने लोटा खाली किया ...मेरी साली रोने लगी !
मैं बोला- अरे आप क्यों रोने लगे?
मेरी साली बोली कि, अब तो आप मरने वाले हो ?
- क्यों ??
- क्योंकि आपने जहर पी लिया !
मैंने कहा- क्यों ...पानी में जहर डाल रखा था ?
मेरी साली बोली -
"पानी में जहर नहीं था , पर टीवी पर बाबा रामदेव कह रहे थे ...खाने से पहले पानी पीयो तो अमृत और... खाने के बीच में पीयो तो दवा ...और खाने के तुरन्त बाद पानी पीयो तो जहर ...और आपने तो रोटी खाते ही पानी पीया है "
अब भाइयो मेरा दिमाग चल गया....मैंने कहा-
"अच्छा.... अगर पानी को बीच में ले आया जाए तो, तब तो नही मरूँगा ना ?"
मेरी साली बोली - अब भला बीच में कैसे लाओगे ?
मैंने कहा - आप चार रोटी और पकड़ाइये !😎
मेरी साली ने मुझे चार रोटी और दे दी...
मैंने वो चार रोटी भी फटाफट ठूस ली ,मेरा पेट ऑलमोस्ट भर गया, पर बाय गॉड आत्मा तृप्त हो गई !
मेरी साली भी खुश हो गई और बोली -
"जीजाजी का दिमाग बहुत तेज चलता है 😎...दीदी बड़े भाग्यवाली है तभी तो ऐसा👌 वर मिला है !! 😂😂😂😂

साळी घरां जीमण

ऐकर मेरी साळी 👸 मनै फोन करयो कै , जीजोजी अबकै नींनाण भोत तकड़ो है ...थे दो च्यार दिन काम भी करवा देया और काचर मतीरा 🍉भी खा लेया !
मतीरां 🍉गो नाम आँता पाण मेरै काळज्यैमें खरखरी माच गी 😋! फेर कुण नीनाण काढै ?? मेरो तो लोटो छलतै गो भी जीधोरो हुवै !
👶 टोरू गी माँ बोली कै जाणो तो पड़सी ....मेरी बहन के रोजगो काम उढ़ावै ?.....चुपचाप जा गे नीनाण कढा गे आ ज्यावो !
अबै कोई चारो कोनी हो .... मैं दूसरै दिन तैयार हुग्यो !
टोरू गी माँ बोली कै ,
"बठै मिनखां दायीं रहणो है ....अठै खावो ज्यूँ आठ -आठ रोट कोनी खाणा और सुबह उठ गे स्नान कर लेया चोखी तरियां .....जे मेरी बहन गी कोई कंप्लेन आ गी तो ,भांपण बाळ दयुं ली "😳
मैं नस हला दी और ऊँट 🐪पर बैठ ग्यो !
शाम गै टेम मैं साढू गै घरै पुग्यो ....बठै मेरी आछी मनुवार हुई ... चूरमो और टिंडसी गो साग ...सागै चोखो मळाईदार दही गो जीमण जीमायो !!
फेर थोड़सी देर मैं इललाजिल्लाबाई गी राग🎵 मांढ सुणी और सो ग्यो !!
दिनुगै नहा गे म्है सगळा खेत ऊठग्या और नीनाण में लाग ग्या !!
अबै भायड़ो मेरो तो हाल इस्यो हुग्यो जाणै ....कणी कमरी सांढ पर बीस मण बाजरी लाद दी है !!😩😫😱
हे सांवरा, कद दिन छिपै और कद लारो छुटै !!
दोफार हुग्या जणा मेरी साळी बोली कै ....जीजोजी रोटी 🍪खा ल्यो !!
मनै भूख तो इसी लाग री ही कै खड्यो ही सीटी चाब ज्याऊं ....पण सगा परसंग्या में इज्जत गी तूड़ी भी तो कोनी कुटाणी !!
खैर , मैं और मेरो साढू जीमण बैठ ग्या !
जीमण में काँगरीया रोटिया घी में गलगच और मटकाचर गी चटणी !!
मेरी साळी मनै च्यार काँगरीया रोटिया दिया और बोली -
"बाई गो मैसेज आयो कै... तेरा जीजोजी सिरफ़ च्यार ही रोटी खावै ओ बांगो नेम है "
तेरा भला हुवै तेरा ....ओ मोबाइल धोबाईल 📱कोनी ....आ है मिनखां गी मौत !!
दस रोटी गी भूख है और च्यार स्युं संतोष करणो पड़सी .....ऐ च्यार रोटिया तो मेरै जाड़ गै चिपजी ?? पेट में के तंबूरो जासी !!
कोई उपाय कोनी हो भायड़ो ...मैं च्यार रोट खाया और ऊपर एक लोटो पाणी पी लियो !!
जियांहि मैं लोटो खाली करयो ...मेरी साळी रोवण लाग गी !
मैं बोल्यो - अरै थे क्यूँ रोवो ?
मेरी साळी बोली कै , थे अब मरस्यो ?
- क्यों ??
- क्यूंकै थे जहर पी लियो !
मैं बोल्यो - क्यों ...पाणी में जहर हो गे ?
मेरी साळी बोली -
"पाणी में जहर कोनी हो , पर टीवी पर बाबो रामदेव कवै कै ...खाणै स्युं पैली पाणी पीवै तो अमृत और... खाणै गै बीच में पीवै तो दुवाई ...और खाणै गै तुरंत बाद पाणी पीवै तो जहर ...और थे तो रोटी खांता पाण पाणी पीयो है "
अबै भायड़ो मेरो दिमाग चालग्यो ....मैं बोल्यो -
"आछ्या .... पाणी नै जे बीच में ल्या दियो जावै ,जद तो कोनी मरुँ ?"
मेरी साळी बोली - बीच में कियां ल्यासो ?
मैं बोल्यो - थे च्यार रोट और झलाओ !😎
मेरी साळी मनै च्यार रोट और दे दिया ...
मैं च्यार रोट और उगाळ लिया ,मेरो पेट तिरपत हुग्यो !

मेरी साळी भी खुश हगी और बोली -
"जीजोजी गो दिमाग भोत तेज चालै 😎...बाई भजगे आयेड़ी है जणा इस्यो👌बर मिल्यो है !!
वाया व्हाट्सएप्प

👫👬💏💑👼👪 अनूदित कथा (प्रेम कहानी) ♠♠♠♠♠


 .
'क्या नाम है तुम्हारा' सभी लड़को से परिचय प्राप्त करते गुरूजी ने एक लड़के से पूछा।
'धनिया'
नाम सुनकर क्लास के सभी लड़के एक साथ हंसने लगे।
गुरुजी भी मुस्कुराए और बोले, ' तुम धनिया हो वो तो ठीक है, पर यहाँ जरा ध्यान से रहना, यहाँ के लड़के बहुत शरारती हैं, कहीं तड़का न लगवा लेना'
लड़को ने फिर से खीखी करना शुरू किया तो गुरूजी ने डपट दिया, फिर पढ़ाने लगे।
धनिया आधुनिक मोगली था मने बस कपड़े पहन कर बोल सकने वाला जानवर, खेत में एक ढाणी में रहता था जहां बिजली भी नही पहुंची थी, ढाणी के पास के प्राइमरी स्कूल में पढ़ा पर अब आगे पढ़ने के लिए मेरे शहर आना पड़ा, मुझे याद भी नही कब वो मेरा दोस्त भी बन गया, जब भी घर आता तो बिजली से चलने वाले उपकरणों को बड़ी अजीब तरह से निहारता खुश होता। टीवी उसके लिए किसी अजूबे से कम न रहा होगा, टीवी चलता देख विचार करता कि 'इतने चलते फिरते इंसान छोटे से बक्से में क्यों घुसे'।
कहते हैं संगति का असर जरूर होता है, धीरे धीरे अब धनिया भी सब सीख रहा था, खैर अब तक ढाणी से स्कूल किसी तरह साईकिल घसीटते आ जाया करता पर जब कॉलेज का समय आया तो मुझे और उसे दोनों को बाहर निकलना पड़ा, बड़े शहर में पहुँच हॉस्टल में कमरा किराये पर लिया और हम सब कुछ इस तरह पढ़ाई में जुटे मानो अब तो आई ए एस से कम कुछ भी स्वीकार न करेंगे। होस्टल के कमरे के ठीक सामने एक ब्यूटी पार्लर था, सुंदर सुंदर महिलाएँ और कमसिन लड़कियों का दिनभर वहाँ आवागमन लगा रहता। और हॉस्टल के लड़के तो यूँ भी अपनी शराफत के लिए पुरे शहर में वर्ल्ड फेमस होते हैं, सुबह हो या शाम दीदार ए यार के चक्कर में दरवज़े पर ही खड़े मिलते। हॉस्टल वार्डन खूब शोर मचाता, कुछ देर शोर का असर भी रहता पर थोड़ी ही देर में, वही घोड़े और वही मैदान।
बेचारा धनिया सबसे अलग और सबसे शरीफ था, लड़कीबाज़ी से कोसों दूर, या तो पढ़ाई करता या नींद में टुन्न हो पड़ा रहता। एक दिन हॉस्टल के लड़के हमेशा की तरह गेट पर खड़े किसी रूह आफ़ज़ा का दर्शनलाभ ले रहे थे कि अचानक धनिया भी बाहर आया, बस बनियान और टॉवल में, लड़कों ने घुड़क दिया अबे ये क्या कर रहा है, कम से कम कपड़े तो पहन लेता। धनिया कुछ न बोला, अंदर गया और मैला कुचैला सा कमीज पायजामा अटका कर बाहर आ गया। लड़कों ने सोचा, अब कौन समझाये, क्यों माथा पच्ची करें, भाड़ में जाने दो हमे क्या। उस दिन के बाद कभी कभार धनिया भी बाहर गेट पर खड़ा हो जाता।
एक दिन दोपहर को मुझसे कहने लगा, 'यार एक बात बोलूँ अगर तू किसी को बोले नही तो।'
मैंने कहा, 'बोल भाई'
वो बोला,'सामने जो ब्यूटी पार्लर वाले हैं न, उनके यहाँ एक लड़की है'
'तो, उसने तुम्हारा क्या खाया'
'अरे खाया वाया कुछ नही, पर मुझे वो बहुत...... बहुत अच्छी लगती है।'
'भाई तेरा दिमाग तो ठिकाने पर है ना? शक्ल भी देखी है उसकी? तुझे कोई और नही बस वही मिली? भईये पढ़ले वही ठीक रहेगा तेरे लिए, घर वालों को पता लग गया न तो ये अच्छा लगना एक मिनट में गन्दा लगने में बदल जाएगा, और मार पड़ेगी सो अलग।'
'क्या यार, तू कैसा दोस्त है, मेरी हिम्मत बढाने की जगह डरा रहा है। :( '
'यार मैं तो सिर्फ सच कह रहा हूँ, बाकी तू बता दे क्या चाहता है'
'मुझे बस उसे अपनी फ्रेंड बनाना है।'
'हाँ बस इसी की कसर बाक़ी थी, सुना था कि दिल आया गधी पर तो परी क्या चीज है, आज देख भी लिया, चल तू कहता है तो फिर देखते हैं'
ब्यूटी पार्लर वालों के घर में एक छोटा लड़का था, नाम था साहिल, हमने उसे अपना दोस्त बनाया, थोड़ी इधर उधर की बाते करने के बाद कुरेदा तो पता लगा, वो उसके ताऊ जी की लड़की है और नाम है शिल्पा।
धनिया को बताया तो नाम सुनकर ही इतना खुश हुआ मानो उसका लग्न ही पक्का हो गया हो। शिल्पा के पूरे दिन का शेड्यूल उसके सामने रख दिया, कब आती है कब जाती है, कहाँ जाती है किसके साथ जाती है इत्यादि इत्यादि, सब कुछ। ले भइये कर ले जो तीन तेरह करना है।
धनिया रोज अपनी रूखी बेजान जुल्फे संवार चुपड़ मने खूबसूरत बनने की फुल ऑन टीराई कर शिल्पा के पीछे पीछे जाता, और वैसे ही मुँह उठा के वापस भी आ जाता। कई बार कहा भाई यूँ टाइम वेस्ट करने का कोई मतलब नहीं बनता, जो कुछ दिल में है, जो कहना है उससे बोल दे जा कर, तुझसे नही कहा जाता तो मैं बोल देता हूँ, या तो गाडी इस पार या उस पार। बोलता नही यार मैं खुद ही बोलूँगा, रोज उसके पीछे जाते वक़्त कह कर जाता,' आज तो पक्का फाइनल बात कर ही लूंगा' पर ढ़ाक के वही तीन पात। उससे कुछ कहा न गया, पता नही शिल्पा के सामने जबान तालु से क्यों चिपक जाया करती थी। रोज उसी के गीत गाता, वो ऐसी है वो वैसी है, हमने बहुत कोशिश की पर धनिया उसे घर से स्कूल, स्कूल से घर पहुंचाने से आगे बढ़ ही नही पाया, शिल्पा जब फर्स्ट इयर में हुई तो उसके घरवालो ने उसकी शादी कर दी, धनिया बहुत रोया पर अब रोने बिलखने और पछताने से क्या होता,आखिर रोते रोते आँसू सुख गए, और बैचैन मन ने भी कटु यथार्थ स्वीकार कर लिया , समय गुजरा और धनिया स्नातक हो गया।
3 साल शहर में रहने से धनिया पूरा शहरी हो गया, उसे देख कर अब कोई अनुमान भी न लगा सकता था कि ये भी कभी गवारों की गिनती में आता था। किस्मत ने और भी साथ दिया और धनिया दिल्ली मेट्रो में श्री धनुष श्रीवास्तव बन स्टेशन कंट्रोलर के पद पर नियुक्त हुआ। वो धनिया जिसे ठीक से हिंदी लिखना, पढ़ना भी न आता था, अब वो फर्राटेदार अंग्रेजी बोलता, सब कहते यार अब तो तेरी लाइफ सेट है शादी वादी कब करवा रहा है। वो सुनता मुस्कुराभर देता फिर इधर उधर की बाते कर अपनी शादी की बात गोल कर जाता, 3 साल और गुजरे एक दिन फोन आया, धनिया ही था, अंग्रेजी में बात की, बोला तुझे वो शिल्पा याद है ?
'कौन शिल्पा!? अरे हाँ यार, पर आज अचानक फिर से ये शिल्पा...........,? '
'यार फिर से कहाँ, मैंने तो उसके अलावा कभी किसी के बारे में सोचा ही नही, तुझे पता है उसके बारे में कुछ ?'
'नहीं यार, क्यूँ?, अब उसके बारे में जान कर करना ही क्या है?'
'यार एक साल हो गया उसके पति का एक दुर्घटना में देहांत हो गया'
'ओह सैड यार, ये तो........, अभी उम्र ही क्या है बेचारी की, वैसे तुझे ये सब किसने बताया'
'साहिल ने, वो दिल्ली में ही छोटा मोटा काम करता है अब'
''ओह अच्छा''
''यार एक बात और भी बतानी थी तुझे, परसों तुझे दिल्ली आना है विद फ़ेमिली, वो क्या है ना कि मेरी शादी है"
"हैं?"
"हाँ, मेरी शिल्पा के साथ"
"अबे ये सब कब किया यार😊" मेरा मुँह आश्चर्य और हर्ष से खुल गया। 😱😀😂
"लम्बी कहानी है, शार्ट में बस ये समझ की मैंने उसके घरवालों को कन्विंस कर लिया, शिल्पा भी मुझे पसन्द करती है, हमेशा से,सब ठीक हो गया यार, भगवान के घर देर है अंधेर नहीं, चल बाद में बात करते हैं" कह कर उसने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया।
मेरी आँखों में धनिये की पूरी कहानी एक पल में फिर से दौड़ गई, मैं सोचने लगा पट्ठा देर से आया पर दुरस्त आया, आज अचानक मेरी नजरों में धनिया सभी प्रेम कहानियों के नायकों से ऊँचा उठ गया था।
‪#‎जयश्रीकृष्ण‬
©अरुणिम कथा

🎪🎪🎪🎪 तिरुशनार्थी ♠️♠️♠️♠️

एक बार एग्जाम के लिए तिरुपति गया था। घरवाले बोले जा ही रहे हो तो लगे हाथ बालाजी से भी मिल आना। मुझे भी लगा कि विचार बुरा नहीं है। रास्ते म...